हिंदी के विरोध में उतरे रजनीकांत, कहा- थोपी नहीं जानी चाहिए कोई भी भाषा

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने की अपील के बाद भाषा विवाद बढ़ता जा रहा है. अभिनेता से नेता बने रजनीकांत ने बुधवार को चेन्नई एयरपोर्ट पर कहा कि तमिलनाडु ही नहीं किसी भी दक्षिण राज्य में जबरन हिंदी या कोई अन्य भाषा नहीं थोपा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल भारत ही नहीं बल्कि किसी भी देश के लिए एक भाषा होना इसकी एकता और प्रगति के लिए अच्छा है. लेकि्न, हमारे देश में जबरन कोई भी भाषा लागू नहीं की जा सकती है.

इससे पहले कमल हासन ने भी कहा था कि 1950 में देशवासियों से वादा किया गया था कि उनकी भाषा और संस्कृति की रक्षा की जाएगी. कोई शाह, सम्राट या सुल्तान इस वादे को अचानक से खत्म नहीं कर सकता. उन्होंने वीडियो जारी कर कहा था कि भाषा को लेकर एक और आंदोलन होगा, जो तमिलनाडु में जल्लीकट्टू विरोध प्रदर्शन की तुलना में बहुत बड़ा होगा. हम सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन तमिल हमेशा हमारी मातृभाषा रहेगी.

अमित शाह ने 14 सितंबर को कहा था कि हिंदी हमारी राजभाषा है. हमारे देश में कई भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन एक ऐसी भाषा होनी चाहिए जो दुनियाभर में देश की पहचान को आगे बढ़ाए और हिंदी में ये सभी खूबियां हैं. केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और बंगाल के नेता पहले ही इस पर विरोध जता चुके हैं.
 



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