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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मथुरा दौरे पर हैं. यहां उन्होंने स्वच्छता ही सेवा 2019 प्रोग्राम की शुरुआत की. यहां पीएम ने कई योजनाओं की शुरुआत भी की. मथुरा से पीएम मोदी प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम की शुरुआत कर रहे हैं.  वे यहां प्लास्टिक चुनने वाली महिलाओं के साथ बैठे और उन्हें सम्मानित भी किया.

मथुरा में पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत भगवान कृष्ण और राधा का जिक्र कर किया. उन्होंने भाषण की शुरुआत ब्रज भाषा में की साथ ही सभी को उन्होंने राधे-राधे भी कहा. पीएम ने कहा कि नए जनादेश के बाद कान्हा की नगरी में पहली बार आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. इस बार भी पूरे उत्तर प्रदेश का पूरा आशीर्वाद मुझे और मेरे साथियों को प्राप्त हुआ है. देशहित में आपके इस निर्णय के लिए में ब्रजभूमि से आपके सामने शीश झुकाता हूं. आप सभी के आदेश के अनुरूप बीते 100 दिन में हमने अभूतपूर्व काम करके दिखाया है. मुझे विश्वास है कि देश के विकास के लिए आपका ये समर्थन और आशीर्वाद हमें मिलता रहेगा.

ब्रजभूमि ने हमेशा से ही पूरे विश्व और पूरी मानवता को प्रेरित किया है. आज पूरा विश्व पर्यावरण संरक्षण के लिए रोल मॉडल ढूंढ रहा है. लेकिन भारत के पास भगवान श्रीकृष्ण जैसा प्रेरणा स्रोत हमेशा से रहा है, जिनकी कल्पना ही पर्यावरण प्रेम के बिना अधूरी है. प्रकृति, पर्यावण और पशुधन के बिना जितने अधूरे खुद हमारे आराध्य नजर आते हैं उतना ही अधूरापन हमें भारत में भी नजर आएगा. पर्यावण और पशुधन हमेशा से ही भारत के आर्थिक चिंतन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.

स्वच्छ भारत हो, जल जीवन मिशन हो या फिर कृषि और पशुपालन को प्रोत्साहन. प्रकृति और आर्थिक विकास में संतुलन बनाकर ही हम सशक्त और नए भारत के निर्माण की तरफ आगे बढ़ रहे हैं. आज स्वच्छता ही सेवा अभियान की शुरुआत हुई है, नेशनल एनीमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम को भी लॉन्च किया गया है. पशुओं के स्वास्थ्य, पोषण, डेरी उद्योग और कुछ अन्य परियोजनाएं भी शुरु हुई हैं. इसके अलावा मथुरा के इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन से जुड़े कई परियोजनाओं शुभारंभ भी हुआ है.

महात्मा गाँधी 150 ये प्रेरणा का वर्ष है. स्वच्छता ही सेवा के पीछे भी यही भावना छुपी हुई है. आज से शुरू हो रहे इस अभियान को इस बार विशेष तौर पर प्लास्टिक के कचरे से मुक्ति के लिए समर्पित किया गया है. प्लास्टिक से होने वाली समस्या समय के साथ गंभीर होती जा रही है. आप ब्रजवासी तो अच्छी तरह जानते है कैसे प्लास्टिक पशुओं की मौत का कारण बन रही है. इसी तरह नदियां, तालाबों में रहने वाले प्राणियों का वहां की मछलियों का प्लास्टिक को निगलने के बाद जिन्दा बचना मुश्किल हो जाता है. अब सिंगल यूज प्लास्टिक से हमें छुटकारा पाना ही होगा. हमें कोशिश करनी है कि 2 अक्टूबर तक अपने दफ्तरों, घरों और अपने आस पास के वातावरण को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करना है.



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