वाइस एडमिरल बिमल वर्मा की याचिका को रक्षा मंत्रालय ने किया खारिज, जानें क्या है मामला

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रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को वाइस एडमिरल बिमल वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने अगले नौसेना अध्यक्ष के तौर पर वाइस एडमिरल करमबीर सिंह की नियुक्ति को चुनौती दी थी. वर्मा ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाया था. उनका कहना था कि वरिष्ठ होने के बावजूद करमबीर सिंह को नौसेना अध्यक्ष बनाया गया.

10 अप्रैल को वर्मा ने रक्षा मंत्रालय में वैधानिक शिकायत दर्ज कराई थी. जिसका जवाब देते हुए मंत्रालय के संयुक्त सचिव (नौसेना) रिचा मिश्रा ने स्पष्ट किया कि नया अध्यक्ष नियुक्त करने के लिए वरिष्ठता एक महत्वपूर्ण पैमाना है लेकिन यह इकलौता पैमाना नहीं है. अतीत में भी नौसेना अध्यक्ष की नियुक्ति करते समय इस नियम को शिथिल किया गया है.

अपने आदेश में मंत्रालय का कहना है, 'केंद्र सरकार ने सावधानीपूर्वक 10 अप्रैल को दाखिल की गई वर्मा की वैधानिक शिकायत पर विचार किया जो उन्होंने खुद को नौसेना अध्यक्ष न बनाए जाने को लेकर दाखिल की थी. उनकी याचिका को योग्यता रहित पाते हुए खारिज किया जाता है. परीक्षण करने पर केंद्र सरकार नियुक्ति के पैमानों को लेकर संतुष्ट है. वर्मा जो सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं उन्हें अयोग्य नौसेना अधिकारी के तौर पर अयोग्य पाया गया.'

इससे पहले वाइस एडमिरल ने सशस्त्र बल ट्रिब्यूनल में खुद को नौसेना अध्यक्ष न बनाए जाने को लेकर याचिका दाखिल की थी. हालांकि नौ अप्रैल को उन्होंने अपनी यह याचिका वापस ले ली थी. उनके वकील ने अपील दायर करने की स्वतंत्रता के साथ केस वापस लिया था. सशस्त्र बल ट्रिब्यूनल में दायर याचिका में वाइस एडमिरल बिमल वर्मा ने कहा था कि वो वाइस एडमिरल करमबीर सिंह से सीनियर हैं और उनको नौसेना प्रमुख पद के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी.

23 मार्च को वाइस एडमिरल करमबीर सिंह को नौसेना का अगला प्रमुख नियुक्त करने की घोषणा की गई थी. यह जानकारी रक्षा मंत्रालय ने दी थी. एडमिरल करमबीर सिंह एडमिरल सुनील लांबा की जगह लेंगे जो मई के अंत में रिटायर हो रहे हैं. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सरकार ने मेरिट आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए यह चयन किया है और पद के लिए वरिष्ठतम अधिकारी की नियुक्ति की जाने वाली परंपरा नहीं अपनाई.



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