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नागरिकता संसोधन क़ानून के खिलाफ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की अर्जी

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को नागरिकता संसोधन क़ानून 2019 की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. जयराम रमेश की ओर से दायर अर्जी में कहा गया है कि यह क़ानून धर्म के आधार पर भेदभाव करता है. समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है. इसमे पड़ोसी देश में प्रताड़ित मुस्लिम समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता हासिल करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है. 

एक दिन पहले इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया है, बिल के प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करते हैं. धर्म के आधार पर वर्गीकरण ग़लत है. मुस्‍लिम लीग के सूत्रों के अनुसार, उनकी पैरवी वरिष्‍ठ वकील कपिल सिब्बल करेगे.

इससे पहले बुधवार को राज्‍यसभा में बहस के दौरान कांग्रेस के दो वरिष्‍ठ नेताओं पी चिदंबरम और फिर कपिल सिब्‍बल ने भी बिल के सुप्रीम कोर्ट में खारिज होने का दावा किया था. हालांकि गृह मंत्री ने इसके जवाब में कहा, कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता संसद को सुप्रीम कोर्ट का डर दिखा रहे हैं, लेकिन हम अपना काम करने से पीछे नहीं हटेंगे.

आपको बता दें कि इस बिल पर राष्ट्रपति कोविंद ने हस्ताक्षर कर दिए हैं जिसके बाद नागरिकता कानून, 1955 में संबंधित संशोधन हो गया है. इस बिल के कानून बन जाने के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों- हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता आसानी से मिल जाएगी.



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