सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को जम्मू-कश्मीर जाने की दी इजाजत, CJI बोले- मैं खुद जाऊंगा श्रीनगर

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उच्चतम न्यायालय ने आज अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के बाद दाखिल हुई कई याचिकाओं पर सुनवाई की. जिसमें एमडीएमके के अध्यक्ष वाइको ने नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की रिहाई को लेकर याचिका दाखिल की थी. जिस पर अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया. इसके अलावा कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक ने घाटी में समाचार पत्र निकालने को लेकर हो रही परेशानी पर याचिका दायर की थी. वहीं एक याचिका में दावा किया गया था कि घाटी के लोगों को चिकित्सा सेवाएं नहीं मिल रही हैं. सभी याचिकाओं पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा. अदालत ने गुलाम नबी आजाद को चार जिलों की यात्रा करने की भी मंजूरी दे दी है.

वहीं उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से इस आरोप पर रिपोर्ट मांगी है कि लोगों को उच्च न्यायालय से संपर्क करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है. सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि अगर लोग उच्च न्यायालय से संपर्क करने में असमर्थ हैं तो यह बेहद गंभीर है, मैं खुद श्रीनगर जाऊंगा. सीजेआई ने एक याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील से कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की रिपोर्ट इससे उलट बताती है तो परिणाम के लिए तैयार रहें.

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यनमंत्री गुलाम नबी आजाद को श्रीनगर, बारामूला, अनंतनाग और जम्मू जाने की इजाजत दे दी है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, 'जो उन्होंने लिखित में दिया है उसके अनुसार वह कोई भाषण नहीं देंगे और न ही कोई सार्वजनिक रैली करेंगे. अपनी यात्रा के दौरान आजाद लोगों के साथ बातचीत कर सकते हैं.

उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला को न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से सोमवार को जवाब मांगा. अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा रद्द किए जाने के बाद से कथित रूप से हिरासत में हैं. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे एवं न्यायमूर्ति एस ए नजीर की पीठ ने केंद्र और राज्य को नोटिस जारी किया और राज्यसभा सांसद एवं एमडीएमके नेता वाइको की याचिका पर सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की. वाइको ने कहा कि वह पिछले चार दशकों से अब्दुल्ला के निकट मित्र हैं. वाइको ने दावा किया कि नेशनल कांफ्रेंस के नेता को ‘बिना किसी कानूनी अधिकार के अवैध हिरासत’ में लेकर, उन्हें संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों से वंचित रखा गया. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए चयनात्मक आधार पर प्रतिबंध हटाए जाएंगे.


 



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