Ahoi Ashtami 2019: 21 अक्‍टूबर को है अहोई अष्टमी का त्यौहार, जानें इस दिन क्या करें और क्या ना करें

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अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घ आयु और उनकी समृद्धि के लिए रखती हैं. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आने वाले इस व्रत को अहोई अष्टमी के व्रत के नाम से जाना जाता है. यह व्रत नि: संतान महिलाएं भी संतान प्राप्ति की कामना से रखती हैं. यह व्रत भी करवा चौथ की तरह ही निर्जल रहकर किया जाता है. लेकिन इस दिन महिलाएं चांद की जगह तारों को अर्घ्य देती हैं तो आइए जानते हैं अहोई अष्टमी पर क्या करें और क्या न करें.

अहोई अष्टमी पर क्या करें-

अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की पूजा करने से पहले भगवान गणेश की पूजा अवश्य करें. क्योंकि भगवान गणेश की पूजा के बिना कोई भी पूजा पूर्ण नही होता.

 अहोई अष्टमी का व्रत निर्जल रहकर किया जाता है. ऐसा करने से संतान की आयु लंबी होती है और उसे समृद्धि प्राप्त होती है.

अहोई अष्टमी के दिन सास-ससुर के लिए बायना अवश्य निकालें. अगर आपके सास ससुर आपके पास नहीं रहते हैं तो इस बायने को किसी पंडित या फिर किसी बुजुर्ग को दे सकती हैं.

अहोई अष्टमी के दिन पूजा में प्रयोग किया जाने वाला करवा नया नहीं होना चाहिए. बल्कि आपको इस दिन करवा चौथ वाले करवे का ही पूजा में प्रयोग करना चाहिए.

अहोई अष्टमी के दिन तारों के अर्घ्य देना चाहिए. ऐसा करने से संतान की आयु लंबी होती है और जिन्हें संतान सुख की प्राप्ति नही हुई है. उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है.

अहोई अष्टमी के दिन व्रत कथा सुनते समय सात प्रकार का अनाज अपने हाथों में रखें और पूजा के बाद इस अनाज को किसी गाय को खिला दें.

अहोई अष्टमी के दिन पूजा करते समय अपने बच्चों को अपने पास बैठाएं और अहोई माता को भोग लगाने के बाद वह प्रसाद अपने बच्चों को खिलाएं. 

अहोई अष्टमी के दिन मिट्टी को बिल्कुल भी हाथ न लगाएं और न ही इस दिन खुरपी से कोई पौधा भी उखाड़े. 

अहोई अष्टमी के दिन किसी निर्धन व्यक्ति को दान अवश्य दें. शास्त्रों के अनुसार किसी भी व्रत के बाद दक्षिणा देने से उस व्रत के पूर्ण फल प्राप्त होते हैं. 

अहोई अष्टमी के दिन पूजन के बाद किसी ब्राह्मण या गाय को भोजन अवश्य कराएं और उनका आर्शीवाद प्राप्त करें.

अहोई अष्टमी पर क्या न करें-

अहोई अष्टमी के दिन किसी भी प्रकार से अपने घर में कलेश न करें. क्योंकि ऐसा करने से अहोई माता नाराज हो जाती हैं और आपको मनोवांच्छित फल की प्राप्ति नही होती. 

अहोई अष्टमी के दिन तारों अर्घ देते समय तांबे के लोटे का प्रयोग न करें. हमेशा स्टील या पीतल के लोटे का ही प्रयोग करें. 

अहोई अष्टमी के दिन घर में तामसिक चीजों का प्रयोग बिल्कुल भी न करें. क्योंकि ऐसा करने से संतान की आयु छिन्न होती है. 

अहोई अष्टमी के दिन सोना वर्जित है. क्योंकि सोने से व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूर्ण फलों की प्राप्ति नही होती. 

अहोई अष्टमी के दिन अपने या फिर किसी और के बच्चे को बिल्कुल भी न मारें. क्योंकि यह व्रत बच्चों के लिए रखा जाता है और ऐसा करने से अहोई माता नाराज हो जाती हैं. 

अहोई अष्टमी के दिन कैंची या सुईं का प्रयोग बिल्कुल भी न करें. क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इन चीजों का प्रयोग वर्जित है. 

अहोई अष्टमी के दिन अपने से बड़े व्यक्ति का अपमान बिल्कुल भी न करें. क्योंकि बिना बड़ो के आर्शीवाद के आपको इस व्रत का फल प्राप्त नहीं हो सकता. 

अहोई अष्टमी के दिन व्रत कथा को एकाग्रचित होकर सुनें. क्योंकि व्रत कथा का भी पूजा के बराबर ही महत्व होता है. इसलिए व्रत अहोई माता का आर्शीवाद प्राप्त करने के लिए व्रत की कथा को एकाग्र होकर अवश्य सुनें. 

अहोई अष्टमी का व्रत करने वाली महिला को किसी की निंदा, चुगली या फिर किसी को भी अपशब्द नहीं कहने चाहिए. 

अहोई अष्टमी के दिन घर में पका हुआ भोजन ही बनाना चाहिए. इस दिन घर में कच्चा भोजन बनाना वर्जित है.



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